गॉस की प्रमेय: अब हर सिम्बल दिखेगा बिल्कुल साफ़
एक जलते हुए बल्ब ($+q$) से निकलने वाली रोशनी ($E$) को सोचें। अगर आप बल्ब को एक कांच के गोले में बंद कर दें, तो उस कांच से जितनी रोशनी बाहर आएगी, वही $\Phi$ (फ्लक्स) है।
याद रखें: रोशनी ($E$) और कांच का टुकड़ा ($dA$) दोनों एक ही तरफ हैं, इसलिए इनके बीच कोई झगड़ा नहीं—मतलब एंगल $0^\circ$ है!
हम आवेश $+q$ के चारों ओर $r$ दूरी का एक गोला मानते हैं। चूंकि गोला हर जगह से बराबर दूरी पर है, इसलिए ताकत $E$ भी हर जगह एक जैसी होगी।
छोटे टुकड़े $dA$ के लिए फ्लक्स:
$$d\Phi = E \cdot dA \cdot \cos 0^\circ$$$\cos 0^\circ = 1$ होता है, इसलिए: $d\Phi = E \cdot dA$
पूरे गोले का क्षेत्रफल $4\pi r^2$ है। गॉस के नियम ($\Phi = q/\epsilon_0$) को लगाने पर:
$$E \cdot (4\pi r^2) = \frac{q}{\epsilon_0}$$पक्षांतर (Transfer) करने पर फाइनल फार्मूला: